13 इसकै गेल्या ए गेल्या वे घर-घर हाँड कै आलसी होणा सिक्खैं सै, अर सिर्फ आलसी न्ही पर बकबक कर दी रहै सै, अर दुसरयां कै काम म्ह भी दखल देती रहवै सै, अर चुगली कर दी रहवै सै। 14 ज्यांतै मै न्यू चाहूँ सूं के जवान बिधवां ब्याह करै, अर बाळक जामै अर घर-बार सम्भाळै, अर किसे बिरोधी नै बदनाम करण का मौक्का ना देवैं। 15 मै इस करकै कहूँ सूं, के उन म्ह तै कईयाँ नै प्रभु का कहणा मानणा छोड़ दिया सै, अर शैतान कै पाच्छै चालणा शरु कर दिया सै।
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