5 अर उन माणसां म्ह बेकार रगड़े-झगड़े पैदा होवै सै, जिनकी अकल खराब हो जा सै, अर वे सच तै दूर हो गये सै, जो समझै सै, के परमेसवर की सेवा करणा कमाई का साधन सै। 9 पर जो साहूकार होणा चाहवैं सै, वे हर तरियां के पाप करण के जरिये धोक्खे म्ह पड़े सै, वे एक जानवर की तरियां जाळ म्ह फँस जावै सै, वे उन चिज्जां नै करणा चाहवै सै जो उनकै खात्तर बेकूफी अर खतरनाक सै अर येए इच्छा उनके नाश का कारण बण जावै सै। 10 क्यूँके रपियाँ का लोभ सारे ढाळ की बुराई की जड़ सै, जिसनै पाण की कोशिश करदे होए घणखरयां नै मसीह की शिक्षा पै बिश्वास करणा बन्द कर दिया सै, क्यूँके वे भोत पईसा चाहवै थे, अर उननै अपणे-आप ताहीं कई ढाळ के दुखां तै छलनी कर लिया सै।
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