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2 कुरिन्थियों 11:23-30

23 के वेए मसीह के सेवक सै? (मै बेकूफ कै तरियां कहूँ सूं) मै उनतै बाध सूं! मन्‍नै उनतै घणी मेहनत करी सै, उनतै घणा बार-बार कैदी बण्या सूं, अनगणित बार पिट्या गया सूं, कई बार मेरी जान संकट म्ह पड़ी। 24 पाँच बर मन्‍नै यहूदी अगुवां कै हाथ तै उन्तालीस कोड़े खाए। 25 तीन बर मन्‍नै बैत खाई; एक बर मेरै पै पत्थर बरसाए गये; तीन बर जहाज, जिसपै मै चढ़या था, टूट गए; एक दिन अर एक रात मन्‍नै समुन्दर म्ह काट्या। 26 बार-बार मन्‍नै सफर करणा पड्या। कदे नदियाँ के, कदे डाकुआं के, कदे अपणे देशवासियाँ के, कदे नगरां के, जात आळा तै, कदे गैर यहूदियाँ तै, कदे जंगळां के कदे समुन्दरां के, कदे झूठ्ठे बिश्वासी भाईयाँ कै बिचाळै जोख्मां म्ह रहया। 27 मन्‍नै कई रात जाग के, भूक्खा-तिसाया रहकै, जाड्डे म्ह; उघाड़ा रह के, करड़ी मेहनत करी अर भोत सी मुसीबत सहण करी सै। 28 इन सारी मुसीबतां के अलावा रोज मेरे पै सारी कलीसियां की भलाई अर फिक्र का बोझ बण्या रहवै सै। 29 जिब कोए कलीसियां म्ह कमजोर हो सै, तो मै अपणे-आपनै कमजोर महसूस करुँ सूं, मै दुखी हो जाऊँ सूं, जिब कोए किसे तै पाप करवावै सै।

30 जै घमण्ड करणा जरूरी सै, तो मै अपणी कमजोरी की बात्तां पै घमण्ड करुँगा।

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