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इफिसियों 4:25,26,28,29,31,32

आत्मा नै शोकित ना करणा

25 इस कारण झूठ बोलणा छोड़कै हरेक अपणे पड़ोसी तै सच बोल्‍लै, क्यूँके हम आप्पस म्ह हम एक ही देह के अंग सां। 26 जै थारे ताहीं गुस्सा आ भी जावै तो उस गुस्से म्ह पाप ना करियो, अर सूरज ढळण तै पैहल्या थारा गुस्सा भी न्ही रहणा चाहिए। 28 चोरी करण आळा फेर चोरी ना करै, बल्के मेहनत करकै अपणी कमाई के जरिये दुसरे माणसां की भी मदद कर सकै, जो जरूरत मन्द हो। 29 कोए भी गलत बात थारे मुँह तै ना लिकड़ै, पर जरूरत कै मुताबिक वोए लिकड़ै जो दुसरयां के बिश्वास की बढ़ोतरी कै खात्तर हो, ताके वा बात जो थारे मुँह तै लिकड़ै सै वा सुणण आळा नै उत्साहित कर सकै। 31 इस करकै सारी ढाळ की कड़वाहट, प्रकोप, गुस्सा, झगड़ा, अर बुराई, सारे बैरभाव नै अपणी जिन्दगी तै लिकाड़ द्यो। 32 एक-दुसरे पै दयालु अर करुणामय हो, अर जिसा परमेसवर नै मसीह म्ह थारे कसूर माफ करे, उस्से तरियां थम भी एक-दुसरे के कसूर माफ करो।

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