पौलुस की कैद तै सुसमाचार की तरक्की
12 हे बिश्वासी भाईयो, मै चाहूँ सूं के थम यो जाण ल्यो, के जो मेरै पै बित्या सै, उसतै भोत सारे माणसां नै सुसमाचार पै बिश्वास करया सै। 13 उरै ताहीं के महाराजा के राजभवन की सारी पलटन अर बाकी सारे माणस यो जाणगे सै, के मै कैद म्ह सूं, क्यूँके मै मसीह का दास सूं। 14 अर प्रभु म्ह जो बिश्वासी भाई सै, उन म्ह तै घणखरे मेरै कैद होण कै कारण, साहस कै गैल परमेसवर का वचन बिना डरे सुणावै सै।
20 मै तो याए मन तै लालसा अर आस राक्खूँ सूं, के मै किसे बात म्ह शर्मिन्दा ना होऊँ, पर साहस कै साथ परमेसवर का वचन सुणा सकूँ, जिसा पैहले मन्नै सुण्या था, चाहे मै जिन्दा रहूँ या मरु, मसीह की बड़ाई मेरी देह के जरिये होन्दी रहवै। 21 क्यूँके मेरै खात्तर जिन्दा रहणा मसीह सै, अर मर जाणा और भी आच्छा सै, क्यूँके मै मसीह कै धोरै चला जाऊँगा।