27 जिसा यशायाह नै पवित्र ग्रन्थ म्ह लिख्या सै, "हे बाँझ बिरबान्नी, तू जो बाळक पैदा न्ही कर सकदी, आनन्दित हो, तू जो प्रसव-पीड़ा तै अनजाण सै, ऊँच्ची आवाज म्ह जयजयकार कर, क्यूँके छोड्डी होई की औलाद सुहागण की औलाद तै भी घणी सै।"
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27 जिसा यशायाह नै पवित्र ग्रन्थ म्ह लिख्या सै, "हे बाँझ बिरबान्नी, तू जो बाळक पैदा न्ही कर सकदी, आनन्दित हो, तू जो प्रसव-पीड़ा तै अनजाण सै, ऊँच्ची आवाज म्ह जयजयकार कर, क्यूँके छोड्डी होई की औलाद सुहागण की औलाद तै भी घणी सै।"
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