पवित्र आत्मा कै जरिये अगुवाई
16 पर मै कहूँ सूं, पवित्र आत्मा नै थारे जीवन म्ह अगुवाई करण द्यो, ताके थम अपणी बुरी आदत्तां नै (लालसा) नै पूरी ना कर सकों। 17 देह की बुरी लालसा पवित्र आत्मा के बिरोध म्ह, अर पवित्र आत्मा देह की बुरी लालसा के बिरोध म्ह लड़दी रहवै सै। इस कारण जो भले काम थम करणा चाह्वो सों वो न्ही कर पान्दे। 18 जै थम आत्मा की अगुवाई म्ह चाल्लों सों, तो थम मूसा के नियम-कायदा के अधीन न्ही सों। 19 देह के काम तो दिक्खै सै, यानी के जारी, भुन्डे़ काम, लुचपण, 20 मूर्तिपूजा, टोणा, बैर, झगड़ा, जळण, गुस्सा, बिरोध, फूट विधर्म, 21 डाह, मतवालापण, रासलीला अर इनकै जिसे और काम सै, इनकै बारै म्ह मै थारे तै पैहल्या कह द्यु सूं जिसा पैहल्या कह्या था, के इसे-इसे काम करणीये परमेसवर के राज्य के वारिस न्ही होंगे। 22 पर आत्मा का फळ प्यार, आनन्द, शान्ति, धीरज, करुणा, भलाई, बिश्वास, 23 नम्रता, अर सयंम सै, इसे-इसे काम्मां के बिरोध म्ह कोए भी नियम-कायदे कोनी। 24 अर जो मसीह यीशु म्ह सै उननै देह की बुरी लालसाओं5:24 बुरी लालसाओं शरीर की बुरी आदत ताहीं क्रूस पै चढ़ा दिया सै। 25 क्यूँके पवित्र आत्मा नै म्हारे ताहीं नई जिन्दगी दी सै, इस खात्तर पवित्र आत्मा नै जिन्दगी के हरेक क्षेत्र म्ह अगुवाई करण द्यो।