3 तन्नै मेरे ताहीं ढुंघे सागर म्ह समुन्दर की थाह तक गेर दिया;
अर मै लहरां कै बिचाळै पड़या था,
तेरी सारी तरंग अर लहर मेरे उप्पर तै बह गी।
4 फेर मन्नै अपणे-आप तै कह्या, ‘मै तेरे स्याम्ही तै लिकाड़ दिया गया सूं;
किस तरियां मै तेरे पवित्र भवन की ओड़ फेर देक्खुँगा?’
5 मै पाणी तै उरै ताहीं घिरया होया था के मेरे प्राण लिकड़े जावैं थे;
ढुंघा सागर मेरे च्यांरु और था, अर मेरे सिर म्ह सिवार लिपट्या होया था।
6 मै पहाड़ां की जड़ां तक पोहच ग्या था;
मै सदा कै खात्तर धरती म्ह बन्द होग्या था;
फेर भी हे मेरे परमेसवर यहोवा, तन्नै मेरे प्राणा ताहीं खड्डे म्ह तै ठाया सै।
9 लेकिन मै ऊँच्चे शब्द तै धन्यवाद करकै तेरे ताहीं बलिदान चढ़ाऊँगा;
जो मन्नत मन्नै मान्नी, उसनै पूरी करुँगा।
उद्धार यहोवा ए तै होवै सै।"
10 अर यहोवा नै महा मच्छ तै हुकम दिया, अर उसनै योना ताहीं स्थल पै उगळ दिया।