3 उस खात्तर द्वारपाल दरबाजा खोल देवै सै, अर भेड़ उसका बोल सुणै सै, अर वो अपणी उन भेड्डां नै नाम ले-लेकै बुलावै सै, अर बाड़े तै बाहरणै ले जावै सै। 4 जिब वो अपणी सारी भेड्डां नै बाहरणै काढ लेवै सै, तो उनकै आग्गै-आग्गै चाल्लै सै, अर भेड़ उसकै गैल-गैल हो ले सै, क्यूँके वे उसका बोल पिच्छाणै सै। 5 पर भेड़ बिगान्ने कै गेल्या कोनी चाल्लै, पर उसतै भाज्जैंगी, क्यूँके वे बिगान्ने का बोल कोनी पिच्छाणदी।"
14 "काम्मल चरवाहा मै सूं, मै अपणी भेड्डां नै जाणु सूं, अर मेरी भेड़ मन्नै जाणै सै।
27 मेरी भेड़ मेरा बोल पिच्छाणै सै, मै उननै जाणु सूं, अर वे मेरै पाच्छै-पाच्छै चाल्लै सै