13 यहूदियाँ का फसह का त्यौहार लोवै था, अर यीशु यरुशलेम नगर म्ह गया। 14 उसनै मन्दर म्ह बळध, भेड़ अर कबूतर बेच्चण आळे अर सर्राफां (पईसा का लेण-देण करण आळे) ताहीं बेठ्ठे होए पाया। 15 फेर उसनै जेवड़ियां का कोरड़ा बणाकै, सारी भेड्डां अर बळधां ताहीं मन्दर तै काढ दिया, अर सर्राफां के पईसे खिन्डा दिए अर उनके पीढ़े पलट दिए, 16 अर कबूतर बेचण आळा ताहीं बोल्या, "इन्हनै उरै तै ले जाओ। मेरै पिता कै घर नै व्यापर का घर ना बणाओ।" 17 फेर उसकै चेल्यां नै याद आया के पवित्र ग्रन्थ म्ह लिख्या होड़ सै, "तेरे घर की धुन मन्नै खा ज्यागी।"
18 इसपै यहूदी अगुवां नै यीशु तै कह्या, "तू म्हारै ताहीं कौण सा अदभुत निशान दिखा सकै सै?" जो इस तरियां के काम तू करै सै, यो साबित हो सकै, के तू उसका हक राक्खै सै।
19 यीशु नै उन ताहीं जवाब दिया, "इस मन्दर नै ढ़ा दो, मै इसनै तीन दिन म्ह बणा दियुँगा।"
20 यहूदी अगुवां नै कह्या, "इस मन्दर कै बणाण म्ह छियालिस साल लाग्गे सै, अर के तू इसनै तीन दिन म्ह बणा देवैगा?" 21 पर यीशु नै उनतै अपणी देह रूपी मन्दर कै बारै म्ह कह्या था। 22 आखर म्ह जिब वो मरे होया म्ह तै जिन्दा होया, जिब उसकै चेल्यां नै याद आई, के उसनै यो कह्या था, अर उननै पवित्र ग्रन्थ के वचन जो यीशु के जिन्दा होण के बारें म्ह बतावै सै, अर उननै यीशु के जरिये कहे होए वचनां पै बिश्वास करया।