पाँच हजार माणसां ताहीं खाणा खुआणा
1 इन बात्तां कै पाच्छै यीशु गलील समुन्दर यानिके तिबिरियास की झील कै धोरै गया। 2 अर एक बड्डी भीड़ उसकै गेल्या हो ली क्यूँके जो अचम्भे के काम वो बिमारां पै दिखावै था वे उननै देख्या करै थे। 3 फेर यीशु पहाड़ पै चढ़कै अपणे चेल्यां कै गेल्या बैठग्या। 4 यहूदियाँ कै फसह का त्यौहार लोवै था।
5 जिब यीशु नै अपणी आँख ठाकै एक बड्डी भीड़ ताहीं अपणे कान्ही आन्दे देख्या, फेर फिलिप्पुस ताहीं कह्या, "हम इनकै खाणे कै खात्तर कड़ै तै रोट्टी मोल ल्यावां?" 6 उसनै या बात उस ताहीं आजमाण ताहीं बोल्ली, क्यूँके वो खुदे जाणै था के वो के करैगा।
7 फिलिप्पुस नै उस ताहीं जवाब दिया, "दो सौ दीनार (200 दिन की मजदूरी) की रोट्टी भी उन खात्तर पूरी कोनी पड़ै के उन म्ह तै हरेक नै माड़ी-माड़ी मिल जा।"
8 उसके चेल्यां म्ह तै शमौन पतरस का भाई अन्द्रियास नै उस ताहीं कह्या, 9 "याड़ै एक छोरा सै जिसकै धोरै जौ की पाँच रोट्टी अर दो मच्छी सै, पर इतणे माणसां खात्तर वे के सै?"
10 यीशु बोल्या, "माणसां नै बिठा द्यो।" उस जगहां घणी घास थी: फेर माणस जिन म्ह आदमियाँ की गिणती करीबन पाँच हजार की थी, बैठगे। 11 फेर यीशु नै रोट्टी ली अर परमेसवर का धन्यवाद करकै बैठण आळा ताहीं बांड दीः अर उस्से ढाळ मच्छियाँ म्ह तै जितनी वे चाहवै थे, बांड दी।
12 जिब वे खाकै छिकगे फेर वो चेल्यां तै बोल्या, "बचे होड़ टुकड़े कठ्ठे कर ल्यो के किमे बगायां न्ही जावै।" 13 आखर म्ह उननै कठ्ठा करया, अर जौ की पाँच रोटियाँ के टुकड्या तै जो खाण आळा तै बची होड़ थी, बारहा टोकरी भरी।
14 फेर जो अचम्भे के काम उसनै कर दिखाये उसनै वे माणस देखकै कहण लाग्गे, "वो नबी जो दुनिया म्ह आण आळा था, पक्का योए सै।"