मरियम का एलीशिबा तै फेटण जाणा
39 कई दिनां बाद मरियम ताव्ली तैयार होकै पहाड़ी परदेस के यहूदा नगर म्ह ग्यी, 40 अर जकर्याह कै घर म्ह जाकै एलीशिबा ताहीं नमस्कार करया। 41 ज्योए एलीशिबा नै मरियम का नमस्कार सुण्या, त्योंए बाळक उसके पेट म्ह उछळ्या, अर एलीशिबा पवित्र आत्मा तै भरगी। 42 अर उसनै ऊँच्ची आवाज म्ह बोलकै कह्या, "तू बिरबानियाँ म्ह धन्य सै, अर तेरी कोख का फळ धन्य सै! 43 मै खुशनसीब सूं जो प्रभु की माँ मेरै धोरै मिलण खात्तर आई? 44 देख, ज्योए तेरे नमस्कार का बोल मेरै कान्नां म्ह पड्या, त्योंए बाळक मेरै पेट म्ह खुशी तै उछळ पड्या। 45 धन्य सै तू क्यूँके तन्नै बिश्वास करया कै जो बात प्रभु नै तेरे ताहीं कही, वे पूरी होई!"