32 साँझ कै बखत जिब सूरज डूबग्या तो माणस सारे बिमारां ताहीं अर उननै, जीनम्ह ओपरी आत्मा थी, यीशु कै धोरै ल्याए। 33 अर साब्ता नगर दरबाजे पै कठ्ठा होया। 34 उसनै घणखरयां ताहीं जो कई ढाळ की बिमारियाँ तै दुखी थे, ठीक करया, घणखरी ओपरी आत्मायाँ ताहीं काढ्या, अर ओपरी आत्मायाँ ताहीं बोल्लण कोनी दिया, क्यूँके वे उसनै पिच्छाणै थी, के यीशु परमेसवर की ओड़ तै भेज्या होया मसीह सै।
एक्ले म्ह यीशु का प्रार्थना करणा
(लूका 4:42-44)
35 तड़कैए दिन लिकड़ण तै पैहल्या, यीशु शमौन के घर तै उठकै लिकड़या, अर एक बियाबान जगहां म्ह गया अर उड़ै प्रार्थना करण लागग्या। 36 फेर शमौन अर उसके साथी उसकी टोह् म्ह गए। 37 जिब वो मिल्या, तो उस ताहीं कह्या, "सारे नगर के माणस तन्नै टोहवै सै।" 38 उसनै उनतै कह्या, "आओ; हम और किते लोवै-धोवै की बस्तियों म्ह जावां, के मै उड़ै भी प्रचार करुँ, क्यूँके मै इसे खात्तर आया सूं।" 39 अर वो सारे गलील परदेस म्ह उनके आराधनालयाँ म्ह जा-जाकै उन ताहीं उपदेश सुणान्दा अर ओपरी आत्मायाँ ताहीं लिकाड़दा रह्या।
कोढ़ के रोग्गी ताहीं ठीक करणा
(मत्ती 8:1-4; लूका 5:12-16)