आखरी भोज
12 अखमीरी रोट्टी कै त्यौहार कै पैहल्ड़े दिन, जिस म्ह वे फसह खात्तर मेम्ने का बलिदान करै थे, उसके चेल्यां नै उसतै बुझ्झया, "तू कित्त जाणा चाहवै सै के हम जाकै तेरे खात्तर फसह भोज की त्यारी करा?"
13 उसनै अपणे चेल्यां म्ह तै दो ताहीं न्यू कहकै भेज्या, "यरुशलेम नगर म्ह जाओ, अर एक माणस पाणी का पैंढ़ा ठाए होए थमनै मिलैगा, उसकै पाच्छै हो लियो; 14 अर वो जिस घर म्ह जावै, उस घर कै माल्लिक ताहीं कहियो, ‘गुरु कहवै सै के बैठक कित्त सै? जिस म्ह मै अपणे चेल्यां गेल्या फसह भोज खाऊँ।’ 15 वो थमनै एक सजी-सजाई, अर त्यार करी होड़ बड़ी अटारी दिखा देवैगा, ओड़ै म्हारै खात्तर त्यारी करो।"
16 चेल्लें लिकड़कै नगर म्ह आये, अर जिसा यीशु नै उनतै कह्या था, उस्से तरियां पाया; अर फसह का भोज त्यार करया।
चेल्यां कै गेल्या फसह का अंतिम भोज
(मत्ती 26:17-25; लूका 22:7-14; 21; यूहन्ना 13:21-30)