3 "सुणो! एक किसान बीज बोण लिकड़या। 4 बोंदे बखत कुछ राही कै किनारे पड़े, अर पंछियाँ नै आकै उन ताहीं चुग लिया। 5 कुछ पथरीली धरती पै पड़े जड़ै उसनै घणी माट्टी ना मिली, अर ढुंघी माट्टी ना मिलण कै कारण तोळाए उग्या, 6 अर जिब सूरज लिकड़या तो जळगे, अर जड़ ना पकड़ण कै कारण सूखगे। 7 कुछ झाड़ियाँ म्ह पड़े, अर झाड़ियाँ नै आग्गै बढ़कै उन ताहीं दाब दिया, अर वो फळ कोनी ल्याये। 8 पर कुछ आच्छी धरती पै पड़े, अर वो उग्या अर बढ़कै फळ ल्याये; अर कोए तीस गुणा, कोए साठ गुणा अर कोए सौ गुणा फळ ल्याया।"
9 फेर उसनै कह्या, "जिसके कान हों, वो ध्यान तै सुण ले।"