31 यीशु नै चेल्यां तै कह्या, "आओ हम किसे एकान्त जगहां म्ह चालकै माड़ा आराम करां।" क्यूँके घणे माणस आवै-जावै थे, अर उननै खाण का मौक्का भी कोनी मिलै था।
32 ज्यांतै वे किस्ती पै चढ़कै सुनसान जगहां म्ह न्यारे चले गए।
पाँच हजार आदमियाँ ताहीं खुआणा
(मत्ती 14:15-21; लूका 9:11-17; यूहन्ना 6:1-14)
33 घणा नै यीशु अर उसके चेल्यां ताहीं जान्दे देखकै पिछाण लिया, अर सारे नगरां तै कठ्ठे होकै उड़ै पांए-पाँ भाज लिए अर उनतै पैहल्या जा पोहचे।
34 उसनै उतरकै बड्डी भीड़ देक्खी, अर उनपै तरस खाया, क्यूँके वे उन भेड्या की तरियां थे, जिनका कोए रुखाळा ना हो; अर वो उननै घणीए बात सिखाण लागग्या।6:34 (2 इति. 18:16; 1 राजा. 22:17)