शास्त्री अर फरीसियों की आलोचना
1 फेर यीशु नै भीड़ तै अर अपणे चेल्यां ताहीं कह्या, 2 "शास्त्री अर फरीसी माणसां नै मूसा नबी के नियम-कायदे सिखाण का हक सै; 3 ज्यांतै वे थारे तै जो कुछ कहवै वो करियो अर मानिये, पर उन जिसे काम ना करियो; क्यूँके वे सिखावै तो सै पर खुद करदे कोनी। 4 वे थारे पै कई नियम लाग्गू करै सै जिसका पालन करणा ओक्खा सै, वे माणसां नै उनपै चाल्लण खात्तर मजबूर करै सै; पर वे खुद अपणे नियमां नै कोनी मानते।"
5 वे अपणे सारे काम माणसां ताहीं दिखाण कै खात्तर करै सै: वे अपणे ताबिजां नै चौड़ा करै सै जिनपै वे पवित्र ग्रंथ के वचन लिखकै शरीर पै बाँधले सै, अर अपणे लत्यां की झाल्लर बधावै सै, ताके लोग उननै धर्मी समझै। 6 भोज म्ह खास-खास जगहां, अर आराधनालयाँ के खास-खास जगहां बैठणा, 7 बजारां म्ह नमस्कार, अर माणसां म्ह गुरु कुह्वाणा उननै भावै सै।