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मत्ती 7:1-5

दुसरयां पै दोष ना लाओ

1 "दुसरयां पै दोष ना लाओ न्ही तो लोग थारे पै भी दोष लगावैंगे। 2 क्यूँके जिस तरियां थम दुसरयां पै दोष लगाओ सों, उस्से तरियां परमेसवर भी थारे पै दोष लगावैगा, जिस तरियां तै थम दुसरयां का न्याय करो सों, उस्से तरियां थारा भी न्याय करया जावैगा।"

3 "तू क्यूँ अपणे भाई की आँख कै तिन्कै जिसी छोट्टी सी बुराई नै देक्खै सै, अर अपणी आँख म्ह लठ जिसी बड़ी बुराई तन्‍नै कोनी दिखदी?" 4 जिब तेरी-ए आँख म्ह लठ सै, तो तू अपणे भाई तै किस तरियां कहवै सै, "ल्या मै तेरी आँख तै तिन्का लिकाड़ द्यु।" 5 इस करकै हे कपटी, पैहल्या अपणे जीवन की बड़ी बुराई नै दूर कर फेर तू अपणे भाई नै आच्छी दाऊँ बुराई तै बचा सकैगा7:5 पैहले अपणी आँख म्ह तै लठ लिकाड़ ले फेर तू अपणे भाई की आँख का तिन्का दाऊँ तरियां देखकै लिकाड़ सकैगा।।

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