15 अर जो मै करुँ सूं, उस ताहीं कोनी जाण्दा, क्यूँके जो मै चाहूँ सूं, वो न्ही करया करदा, पर जिसतै मन्नै घृणा आवै सै वोए करै सूं।
24 मै किसा निरभागा माणस सूं! मन्नै इस पापी सुभाव तै जो मौत लेकै आवै सै, कौण छुड़ावैगा? 25 म्हारै प्रभु यीशु मसीह कै जरिये परमेसवर का धन्यवाद होवै। ज्यांतै मै अपणी समझ तै तो परमेसवर के नियम-कायदे नै मानणा चाहूँ सूं, पर पापी सुभाव के कारण मै पाप का गुलाम सूं।