नियम-कायदे अर पाप
7 तो हम के कह्वां? के मूसा नबी के नियम-कायदे पाप सै? न्ही! बिलकुल न्ही! बल्के नियम-कायदा ए सै, जो मेरे ताहीं बतावै सै, के पाप के सै! जै नियम-कायदे न्ही कहन्दे, के लालच मतना करै तो मै लालच नै जाण ए न्ही पान्दा। 8 पर पाप नै मौक्का पाकै, हुकम कै जरिये मेरै म्ह सारी तरियां का लालच पैदा करया, क्यूँके बिना नियम-कायदे पाप मुर्दा सै।
17 तो इसी हालत म्ह जो मेरे म्ह बुरे काम करै सै, वो मै न्ही, बल्के पाप सै, जो मेरै म्ह बस्या होया सै। 18 क्यूँके मन्नै बेरा सै के मेरै म्ह यानिके मेरे पापी सुभाव म्ह कोए आच्छी चीज वास कोनी कर दी। मेरा जी तो भले काम करण की इच्छा तो करै सै, पर भले काम मेरै तै बणदे कोनी। 19 क्यूँके जिस आच्छे काम करण नै मेरा जी करै सै, वो तो कोनी करदा, पर जो बुरे काम करणा न्ही चाहन्दा, वोए करुँ सूं। 20 इस करकै जै मै वोए करुँ सूं जो न्ही चाहन्दा, तो उसका करण आळा मै कोनी रहया, पर पाप सै जो मेरै भित्तर म्ह बस रहया सै।
23 पर मेरे भित्तर एक नियम-कायदा की शक्ति काम करण लागरी सै, जो मेरी पापी अन्तरात्मा तै युद्ध करै सै। या नियम-कायदा की शक्ति मेरी अन्तरात्मा नै पाप का गुलाम बणावै सै जो इब भी मेरी देह म्ह सै।