2 जै एक माणस सोन्ने के छल्ले अर सुथरे लत्ते पहरे होए थारी मण्डळी म्ह आवै, अर एक कंगाल भी मैल्ले कुचेले लत्ते पहरे होए आवै, 3 अर थम उस सुथरे लत्ते आळे नै इज्जत देकै कहो, "तू ओड़ै खास जगहां बैठ," अर उस कंगाल तै कहो, "तू ओड़ै खड्या रहै," या "मेरै पायां धोरै बैठ।" 4 तो के थमनै भेद-भाव कोनी करया, अर बुरे विचार तै न्याय करण आळे न्ही बणे?