25 तेबेई तो आऊँ तुसा खे बोलूँआ कि आपणी जिन्दगिया रे बारे रे ये चिन्ता नि करो कि आसे क्या खाऊँगे और क्या पिऊँगे? ना आपणे शरीरो रे बारे रे कि क्या पईनुँगे? क्या जिन्दगी रोटिया ते और शरीर टाल्लेया ते बढ़ी की निए? 26 सर्गो रे पंछिया खे देखो, सेयो ना बांदे, ना बाडदे और ना ई पण्डारो रे कट्ठा करदे, तेबे बी आसा रा स्वर्गिय पिता तिना खे खुल़ाओआ। क्या तुसे तिना ते जादा किमती निए? 27 तुसा बीचा ते एड़ा कुण ए, जो चिन्ता करी की आपणियां जिन्दगिया री एक कअड़ी बी बढ़ाई सकोआ?"
28 "तुसे टाल्लेया री चिन्ता कऊँ करोए? बांके जंगल़ी फूला पाँदे त्यान करो कि सेयो किंयाँ बड़ोए? सेयो ना तो मईणत करदे ना आपू खे टाल्ले बणाओए। 29 पर आऊँ तुसा खे बोलूँआ कि राजा सुलेमान आपणे सारे एशो-आरामो रे रओ था और बऊत बांके टाल्ले पईनो था, पर तेबे बी तेसरे टाल्ले तिना जंगल़ी फूला ते जादा बांके नि थे। 30 तेबेई तो जेबे परमेशर मैदानो रे काओ खे, जो आज आए और काल आगी बीचे फूकी देणा, तो जो तिदे बी एड़े बांके फूल खिलाओआ, तो ओ कम विश्वास करने वाल़ेयो! तुसा खे तेस इना ते बढ़ी की बांके टाल्ले कऊँ नि पनयाणे?"
31 "तेबेई तो तुसे चिन्ता करी की ये नि बोलणा, ‘आसे क्या खाऊँगे?’ और ‘क्या पिऊँगे?’ और ‘क्या पईनुँगे?’ 32 दूजी जातिया रे लोक इना सबी चीजा री चिन्ता करोईया, पर तुसे इना चीजा री चिन्ता नि करो। कऊँकि तुसा रा स्वर्गिय पिता जाणोआ कि तुसा खे इना सबी चीजा री जरूरत ए। 33 इजी री खातर, जे पईले तुसे परमेशरो रे राज्य री टोल़ करो और धार्मिकता री जिन्दगी जिओ, तो यो सब चीजा तुसा खे मिली जाणिया। 34 इजी खे कालकी चिन्ता नि करो, कऊँकि काल का जो दिन ऊणा, तेस आपणी चिन्ता आपू करी लणी, आजो खे तो आजका दु:ख ई बऊत ए।"