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प्रकाशितवाक्य 21

अमबर कनधरत

1 िैं वरकनधरतिी, ोंि धरतकनवरे। कनसमा। 2 िैं पबिहर यरशलिखया, जड़ा वरपरमवरितरफथलओआ ै। उस हरईय़िांितया, िकपड़े पहनकरकनृंितयजड़ी ़े िकरणांै।

3 िैं इक अबजड़ी परमवरिंसनी, "ि, परमवरां िअपणघर बणा।" उनउना, कनउदे, उनअपउनअपणां अपनकनउनउनेंकनउनउसयपरमवरअपनेंा। 4 परमवरउनिां हखूंेंे; कनइदहणोंा, ोंा, दरमहसा, ोंोंि िां िां ां यब िां

5 कनजड़ा िंसनपर ठया, उनलया, "ि, ैं सब करिै।" िउनलया, "िि े, ोंि जड़ा ैं लदउदपर भरकरसकदै। गलां पकिां।"

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