मंडळीन सेवा-चाकरी करन्या
1 जी वात संय छे की जु बी नी पुडारी बणन्ने हेर करे ती चु भलो काम करनेन हेर करे। 2 डाहलु असली जीवाय जीवण्यु हवणु चाहजे तेरी जीवाय मां काय बी वाक नी हय पुडारी एकुत लाडीवाळु हवणु चाहजे ने तेरी लाडी तेरे पर नी अदराय करे असी जीवाय जीवण्यु हवणु चाहजे; दसो पेट असो करन्यु नी बाकुन आपसान जीव काजे कब्जाम राखीन दीसरा साते वारु वेहवार राखण्यु हवणु चाहजे चु असु माणुस हवणु चाहजे तेरी दीसरा ईज्जत करता हय ने चु आपसान घर आवण्यान आव-भाव करीन तींद्री खातरी करने वाळु हवणु चाहजे, ने वाळाक खरली वात हुनर सी सीकाड़ने वाळु हवणु चाहजे। 3 नी पुडारी दारु पीणेवाळु ते नी लड़ाय करने वाळु नी हवणु बाकुन चु भुळु रहणु चाहजे, ने नी लड़ाय ने नी धनेन लालच्यु हवणु चाहजे। 4 चु आपसान घरनाक अतरुत वारु अगवाय करन्यु, ने तेरा पुर्या-पारी जलम तेरु अबरु राखता हय, ने आखी वातेम तेरु हुकुम मानीन तेरा कब्जाम रहता हय। 5 कदी तीनाक आपसा घरन्यान वारु अगवाय ने राखवाळी करता नी आवड़े, ती चु भगवानेन मंडळीन आखा माणसेन राखवाळी कसु करसे? 6 पछेन ज की ईसु पर भुरसु करला नवला चेलाक, नी ते चु असु कय्न मटाय करने बाजी जासे की, मे मामार पुडारी बण गुयु; ने असु करीन चु भुतड़ान तसु मटाय करीन नीयावेन डंड हात कर लेसे। असो नी हवणु चाहजे। 7 ने बाहार वाळा माणसे बी तेरी वाक नी-नीकाळनु चाहजे, असो नी हवे की भुतड़ु तीनाक तेरा गुनान फांदेम फांद लेसे।