16 जलम खुस रवजु। 17 भगवान धड़े अळी-अळीन दुवा कर्या करजु, 18 हर वात मां, भगवान काजे बेसकु वारु कवता रहु। काहाकी ईसु मसी मां तुंद्रे धड़े भगवानेन बी जीत मरजी छे।
19 भगवानेन चुखली-आत्मान अगवाय काजे घुण रुकता। 20 खास करीन, भगवानेन अघी सी आवणे वाळी वात बताड़न्या माणसे वाटे कहली वातेक फालतु घुण समजु। 21 आखी वात काजे पारखीन देखणु चाहजे: जी वारु छे, तीनी वातेक मानीन जीवु। 22 आखी भातीन नाव-बद्दी सी छेटा रहु।
23 सांतीन भगवान आपसुत तुहुंंक पुरी रीती सी चुखु करे, ने तुंद्री जीव-आत्मा ने मन ने डील हामरा मालीक ईसु मसीन आवणे लग पुरु-पुरु ने नी-गुनाळा बणीन रवे। 24 तुंद्रु बुलावणे वाळु खरलु छे, ने चु असुत करसे।