आकरी चेतावणी ने आव-भाव1 हय तीसरी कावा मे तुंद्रे धड़े आवो, "दुय नीते तीन गवान मुंहडा सी हरीक एक वात ठेहरावसे।"
आकरी चेतावणी ने आव-भाव1 हय तीसरी कावा मे तुंद्रे धड़े आवो, "दुय नीते तीन गवान मुंहडा सी हरीक एक वात ठेहरावसे।"