Mostrando versículos 48–63 de 71
48अमर जीवनेन रुटु मेत छे।
51सरग सी उतर्लु अमर जीवन आपण्यु रुटु मेत छे, कदी काहनुक जु रुटु खासे चु जलम जीवतेलु रवसे ने जु रुटु मे ईनी कळीन माणसेन जीवन वाटे आपीस, चु रुटु मारो मास छे।"
63भगवानेन चुखली-आत्मा जीवन आपे। डील सी काय फायदु नी हय जी वात मे तुंद्रे सी कहंलु चे आत्मा छे ने जीवन बी छे।