25 ए, घरवाळा, तसात, तुहुंं जाणु की ईसु मसी आपसी मंडळी काजे अतरा जादा परम कर्यु की चु आपसी मंडळी वाटे आपसु जीव लग आप देदु, तसात तुहुंं आपणी-आपणी घरवाळी काजे परम करु। 26 की हीनाक बुलेन साहरे पाणी सी उंगळायान चुखु झण करीन चुखलु बणावे। 27 हय चु आपसी मंडळी काजे एक नवली लाडीन तसी सींगार करीन ने घाटाळी बणावीन आपसा अगळ उबी करने करीन चु असु कर्यु। जसु नवली लाडी काय बी दाग नी रहे, ने चामड़ो चीमाय्लो नी रहे, ने असली काहनी बी दीसरी कसर नी रहे, तसीत ईसुन मंडळी बी नी-गुना वाळी ने चुखली रवसे।