ईसु आंधी काजे हुगु राखे
22 एक दाहड़ु ईसु आपसा चेला काजे असु कह्यु, "चालु आपणु दरीयान पली धड़े जाजे।" ने चे ढंड्या मां बस गुया, ने पली धड़े जाणे बाजी गुया। 23 ढंड्यो पाणी मां जाणे बाजी रवलो, ने ईसु सुय गुयु; तीनी टेमे दरीया मां आंधी आवी, ने ढंड्या मां पाणी भरायणे बाजी गुयो, ने चे आफत मां पड़ गुया। 24 तत्यार चेला ईसु धड़े आवीन तीनाक जागाड़्या ने कह्या, "ए मालीक! ए मालीक! हामु डुबणे बाजी र्या।"
तत्यारुत ईसु जाग गुयु, ने चु आंधी काजे ने दरीयान झलक काजे झीचकार्यु, ने आंधी ने दरीयान झलक सेळी पड़ गुय। 25 ने ईसु आपसा चेलाक असु कह्यु, तुंद्रु भुरसु कां छे? बाकुन चे बीही गुया, ने चे चकराय गुया,
ने चे-चेत असा कह्या, "जु असु काहनु माणुस छे? चु आंधी ने पाणी काजे लग हुकुम आपे, ने चे हेरी वात माने।"