9 ने ईसु तीनुक कह्यु, "तुहुंं आपसान रीत काजे मान्ने करीन चतुर बणीन भगवानेन हुकुम कसा तुहुंं टाळ देवु। 10 काहाकी मुसु हुकुम देदलु की, ‘आपसान बास ने आपसान मायन ईज्जत कर’ ने ‘जु काहनुक बास ने माय काजे बुली दी देय, तीनाक मार देणु चाहे।’ 11 बाकुन तुहुंं कहुं की कदी काहनुक माणुस आपसान बास ने माय सी कहें ‘की मारी जीनी चीज सी तुहुंंक फायदु हवणु हतलो च मे भगवान काजे आप देदु, ने हय तुंद्री सेवा नी करो।’ 12 तत्यार तुहुंं तीनाक तेरा बास ने तेरी मायन काय बी चाकरी नी करने देवु। 13 असा करीन तुहुंं तुंद्री नेम काजे पाळे ने भगवानेन बुले टाळ देवु ने अळी असात बेसका काम करने बाजी र्या।"