24 ईसु तीनुक एक अळी दाखलु कह्यु: "सरगेन राज तीना माणसेन तसों छे, चु तेरा खेत मां वारलु बीज एरलु छे। 25 बाकुन जत्यार माणसे सुवणे बाजी रवला, ती तेरु वेरी आवीन गहुं मां जळ-गहुं एरीन जाती रयु। 26 जत्यार डीरा नीकळे ने पान्टा लाग्या ती जळ-गहुंन बीज देखाव पड़े। 27 अतरामा पावर्या मालीकेन घर आवीन मालीक काजे कह्या, ए मालीक, तु ते तारा खेत मां वारलु गहुंन बीज नी एरलु? ती जळ-गहुंन कसा उंग्या? 28 ईसु तीनुक कह्यु, ज काहना वेरीन काम छे। ती पावर्या तीनाक पुछ्या ‘काय तारी मरजी हय?’ ती हामु जाय्न तीनु जळ-गहुं काजे उखाळ देजे। 29 मालीक कह्यु, ‘नी, असा मां करु नीते कांखुर मायन जळ-गहुं भेळा वारलु गहुं बी उखळी जासे। 30 काटणे लग दुयु काजे एक साते मटा हवणे देवु ने काटणेन टेम मां काटणे वाळा सी कवीस की पेहल जळ-गहुं भेळा करीन धपाड़ने करीन हींद्रा गाठड़ा बांद लेवु, ने गहुं काजे मारा खळा मां भेळा करु।’"
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