गरा आवणे टेम
3 जत्यार हयु जेतुनेन बयड़ा पर बसी रवलु, ती चेला एखलात ईसु धड़े आवीन कह्या, "हामुक बताड़ की जी वात कत्यार हवसे? तारो आवणेन ने कळीन खत्तम हवणेन काय सहलाणी24:3 चिन्ह रवसे।"
4 ईसु तीनुक जपाप आप्यु, चेतीन रवु! तुहुंंक कुय बी भटकाड़नु नी चाहजे। 5 काहाकी बेसका माणसे असा रवसे चे मार नाव सी आवीन कह्वसे, मे मसी छे! ने बेसका काजे भटकाड़ी देसे। 6 तुहुंं लड़ाय पर लड़ायन वात सामळसु, ती घाबरायु घुण, काहाकी असो ते हवण्यत छे, बाकुन तीनी टेमे कळजुग सरनु नी हय।