51 देखा, मै तुम्हर लग लुके हर बात कथो हम सब नेहको मरबो, बलुक हमर सब के सकल बदल जही, 52 पल भर हे, आंखी मूंदत, आखरी तुरही बजतै, मरे हर लोथ देह हे हुइके जिन्दा हुइ जइही अउ हम सबके सकल बदल जही।
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51 देखा, मै तुम्हर लग लुके हर बात कथो हम सब नेहको मरबो, बलुक हमर सब के सकल बदल जही, 52 पल भर हे, आंखी मूंदत, आखरी तुरही बजतै, मरे हर लोथ देह हे हुइके जिन्दा हुइ जइही अउ हम सबके सकल बदल जही।