8 तुम धीर धरे रइहा, अउ जगत रइहा काखे तुम्हर बिरोधी परेत गरजय बाले बघवा के जसना हबै हइ खोज हे बागत रथै कि करही चीर खाव। 9 तुम बिस्वास हे मजबूत हुइके ओखर सामना करिहा, तुम जानत हबा कि दुनिया भर हे तुम्हर भाई-बेहन हइ मेर के दुख भोगत हबै।
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