19 इहैनिता ग्यानी मनसेन के बचन अउ बोहत बिस्वासओग हुइ गय हबै, ओखर हे तुम्हर धियान अक जिघा करैका ठीक हबै, ओसनेन निक्खा हबै जसना जलत हर चिमनी हे धियान अक जिघा करैका, जब तक सुबेन्नेन झइ होय अउ तुम्हर हिरदय हे भिनसारे के तरइया नेहको निकडथै।
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