15 हमर परभु के धीर के मुकति समझा, ठीक जसना हमर पिरिया भाई पोलुस उनही दय गय ग्यान के जसना तुमही लिखे हबै। 16 जसना ऊ अपन सगलू चिट्ठी हे इन बातन के चरचा करथै, उन चिट्ठी हे कुछ असना बात हबै, जउन समझै हे कठिन हबै, जउन अनपढ अउ हुसियार मनसे बिगाड देथै, हइ मेर अपन नास के लेथै।