1 एखर बाद ऊ स्वरगदूत मोके जीवन देय बाले पानी के अक्ठी नदिया देखाइस, ऊ नदिया आर पार कांच जसना उजियार रथै ऊ भगवान अउ गेडरा के राजगद्दी लग बहत निकडथै। 2 हइ नदिया सहर के बडा रास्ता लग बहत, नदिया के दोनो पल्ला जीवन के रूख हबै, जेहमा बारह मेर के फडुहा उत्पन्न होथै, हइ रूख हे हर महिना फडुहा देथै हइ रूख के पत्ता हे देस-देस के मनसेन के निक्खा करै के सक्ति हबै। 3 अब लग उहां सरापित कुछु चीज नेहको रही, भगवान अउ गेडरा के राजगद्दी ऊ सहर हे होही, ओखर हरवाह उनखर महिमा करही। 4 ऊ ओखर सकल के देखहिन अउ ओखर नाम उनखर लीलार हे लिखररे हर होही। 5 उहां फेर कबहुन रात नेहको होही, उनके चिमनी या बेरा के उजियार के जरूरत नेहको होही, काखे परभु भगवान उनखर उजियार होही, ऊ हरमेसा-हरमेसा राज करही।
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परकासितवाक्य 22
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