6हमही मिलेहर अनुगरह के जसना हमर बरदान अलगे-अलगे हबै, हमके आगू कर बात गुठेमै बाले के बरदान मिले हबै, ता बिस्वास के जसना ओखर इस्तेमाल करै।
12आसा हे खुसी, दुख हे धीर अउ बिनती हे नियम बनाय रखा।
13पवितर मनसेन के जरूरत के निता दान दय करा अउ पहुनन के सेबा करा।