12 इहैनिता भगवान के चुने हर पवितर मनसे अउ माया इज्जत के जसना अपन हिरदय हे करुना, भलाई, दया, कोमरता, दीनता अउ धीर धारन के लेया। 13 आपस हे सहै बाले अउ छमा करै का भाव बने रहै, अगर कउनो के दूसर के परति सिकायत होय, ऊ उके उहै मेर छमा करै जसना परभु तुमके छमा करे हबै।