15 मसीह के सान्ति तोर मन हे राज करै, इहै सान्ति के निता तुम, अक्ठी देह के अंग बनके, बुलाय गय हबै, हरमेसा धन्यबादी बने रहा।
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15 मसीह के सान्ति तोर मन हे राज करै, इहै सान्ति के निता तुम, अक्ठी देह के अंग बनके, बुलाय गय हबै, हरमेसा धन्यबादी बने रहा।