8 पय अब तुम सगलू गुस्सा, रोस, भेदभाव, निन्दा अउ बेकार भासा बोलै का छांड देया। 9 अक दूसर लग झूठ झइ बोला काखे तुम पुरान आदत के ओखर काम सहित उतार चुके हबा। 10 अउ अब तुम नबा आदत के पहिन लय हबा, हइ आदत अपन दुनिया के बनाय बाले के छाप के जसना सही ग्यान के निता नबा होउत जात हबै।
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