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João 4

46 तब गलपरदआथै, िां कर रस बनै, परदहब रथै, खर रवकफरनहरथै। 47 हइ नकि यहिलग गलपरदआय हबै, हब ओखर िजथअउ ओखर लग िनतकरगथै, ि चलकरविकर े, रवमरहबै। 48 ओखर लग कथै, जब तक मनसिअउ चकिहकखहा, तब तक कबहिहककरिा।

49 हब ओखर लग कथै, "परभरवमरलग अगचल"

50 ओखर लग कथै, "रविहबै।"

मनसकहहर िकरथअउ अपन घर कढ जथै। 51 रथै, ि ओखर हरविलथअउ ै, "ि लरकिहबै।"

52 बक लग छथै, तकिगय रहि? कथकल पहरकरबन अक बजओखर उतर गइस53 लरकजथै, ि उहइस, तकलग कहरहि, ि रविहबै, तब ओखर सगलघर परविकरथै।

54 हइ सर चकििरथै, जउन यहिगलपरदआयककरथै।

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