39 तुम पवितर किताब के पढथा, काखे तुम्हर सोच हबै कि तुमही उनखर दवारा सबरोज के जीवन मिलै ऊ उहै जेखर गवाही देथै।
39 तुम पवितर किताब के पढथा, काखे तुम्हर सोच हबै कि तुमही उनखर दवारा सबरोज के जीवन मिलै ऊ उहै जेखर गवाही देथै।