22 ऊ यरुसलेम लग नियाव के गुरू आयके कथै, कि यीसु हे परेत हबै अउ ऊ भुतवा के मुखिया के मदद लग उके निकाडथै,
23 इहैनिता यीसु पंडित के लिघ्घो बुलाथै, अउ किस्सा दइके गुठेथै, कि भुतवन के भुतवा कसके निकाड सकथै। 24 अगर कउनो राज अपनै हे झगडै, अउ फूट पड जाय ता कसके स्थिर रही सकथै। 25 अगर कउनो घर हे झगडा हुइ जाय, या फूट पड जही, ता ऊ कसके स्थिर रही सकथै। 26 इहैनिता भुतवा अपन बैरी हुइके अपन हे झगडा करवामै के चाहथै, ता निक्खा नेहको रह सकथै, पय भुतवन के बढाय के टेम आ गय हबै।
27 अगर कउनो मनसे जउन बलवान हबै, जब तक ओही बांध नेहको ले, तब तक ओखर घर के नेहको लूट सकथै।
28 "मै तोर लग सही कथो, सगलू मनसे के बुराई अउ पापी जउन करथै, पाप छमा कर दय जही। 29 पय जउन कोनो पवितर आतमा के तरफ बुराई करही, ऊ मनसे के कबहुन छमा नेहको करै जही, ऊ मनसे सबरोज के निता पापी ठहरही।" 30 काखे उन कथै पंडित कहे करथै, "कि ओखर भित्तर भुतवा हबै।"