6 हमही मिलेहर अनुगरह के जसना हमर बरदान अलगे-अलगे हबै, हमके आगू कर बात गुठेमै बाले के बरदान मिले हबै, ता बिस्वास के जसना ओखर इस्तेमाल करै। 7 अगर सेबा करै के बरदान मिले हबै, ता हमके सेबा करै के चाही, अगर हमके सिक्छा देय के बरदान होय ता हमके सिखामै चाही। 8 अगर अक दूसर के खुसी करै के बरदान हबै, ता खुसी करा अउ अगर अक दूसर के देय के बरदान हबै, ता उदारता लग देया अउ जेही अगुवाई करै के बरदान मिले हबै, ता मगन लग अगुवाई करतै रहा अउ जेही दया के बरदान मिले हबै, उके दया करै चाही।