भभिस्य के महिमा
18 मै समझथो कि हमर उप्पर जउन महिमा परगट होयका हबै, ओखर बरोबरी हे हइ टेम के दुख कुछु नेहको हबै। 19 काखे हइ दुनिया बडी आसा के संग ऊ टेम के ओरगे हबै, जब भगवान कर टोरवा के परगट करे जही। 20 हइ रचना तो उदेस्य के बिगर हुइ गय हबै, हइ अपन इक्छा के जसना नेहको पय भगवान के इक्छा के जसना होय हबै, जउन उके हइ आसा हे अधीन के दय हबै। 21 कि खुदय दुनिया बिनास के गुलाम लग मुकति पाय के भगवान कर टोरवा के महिमा अउ आजाद के मगन होही। 22 हमही पता हबै कि आज तक सगलू दुनिया कस्ट अउ दुख लग कराहथै। 23 अउ सिबाय दुनिया परेसान हुइके नेहको तडपथै, पय हमु परेसान होथन, जिनही आतमा के फडुहा मिलिस, जउन खुदय कराहथै, अउ लेपालक टोरवा बनै के मतलब अपन देह के मुकति के निता ओरगथन। 24 जउन चीज के आसा के दवारा करे जथै, ऊ देखै हे आय, ता फेर आसा कछो हबै, काखे जउन चीज के कउ देखथै, आसा काहिन करी? 25 अगर हमर आसा के बारे ऊ हबै, जेही हम देखे नेहको हबन, तब हम धीर लग अउ बोहत आसा हे ओरगथन।
26 पवितर आतमा हमर ढिलवा हे हमर मदत करथै, हम हइ नेहको जानथन कि हम कसना बिनती करै चाही, पय आतमा खुदय हुकरी भर के जउन सब्द दवारा परगट नेहको करे जाय सकथै, हमर निता बिनती करथै। 27 भगवान हमर मन के बात जानथै अउ समझाथै, कि आतमा के मकसद काहिन हबै? काखे आतमा भगवान के इक्छा के जसना हरवाहन के निता बिनती करथै।