28 हम जानथन कि जउन मनसे भगवान लग माया करथै, अउ ओखर मकसद के जसना बुलाय गय हबै, भगवान उनखर भलाई के निता सगलू बातन हे उनखर मदत करथै। 29 जिनही पहिलेन लग भगवान चुने हबै कि उन पहिलेन अपन टोरवा के स्वरूप ठहराय हबै, काखे ऊ बोहत लग भाइन हे भाई बन सके। 30 इन सगलू बातन के देखत हम काहिन कह सकथन? अगर भगवान हमर पल्ला हबै ता हमर बिरोध कोहर कर सकथै।
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