भगवान कर माया
31 अउ काहिन कहि? अगर भगवान हमर तरफ हबै, ता कोहर हमर बैरी होही? 32 भगवान अपन खास टोरवा के नेहको बचाइस, ऊ हम सब के निता उके सउप दइस, ता एतका देय के बाद का ऊ हमही अपन टोरवा के संग सब कुछ फिरी हे नेहको देही? 33 जिनही भगवान चुने हबै, उनखर हे कोहर आरोप लगाय सकि? भगवान उनही नियाइ ठहरामै बाले हबै। 34 फेर कोहर हबै जउन हमही सजा के हुकुम देही, यीसु मसीह हे जउन मर गय रथै, अउ मुरदा लग जिन्दा होही अउ भगवान के दहिना पल्ला हबै अउ ऊ हमर निता निबेदन करथै।