14 तुम नेहको जानथा कि कल तुम्हर का हालत होही। तुम्हर जीवन अक्ठी कोहिटा मेर हबा, ऊ अक घरी देखही फेर उजाय जही4:14 नीति 27:1। 15 तुमही हइ कहै चाही, "अगर परभु के इक्छा होही, ता हम जिन्दा रहबो अउ हइ या ऊ काम करब।"
14 तुम नेहको जानथा कि कल तुम्हर का हालत होही। तुम्हर जीवन अक्ठी कोहिटा मेर हबा, ऊ अक घरी देखही फेर उजाय जही4:14 नीति 27:1। 15 तुमही हइ कहै चाही, "अगर परभु के इक्छा होही, ता हम जिन्दा रहबो अउ हइ या ऊ काम करब।"