32 शेवली कावा हाव यो जुवता छे कि तुमू चिंता नी होय। वियाव मानुस पोरबु की वात की चिंता मा रयता छे कि पोरबु क कोसो खुश राखे। 33 पुन वियाव मानुस संसार की वात करी चिंता मा रयता छे कि आपसी बायर क काही रीति छे खुश राखे। 34 वियाव आरू अवियाव आरू वियाव मा भी भेद छे: वियाव पोरबु की चिंता मा रयती छे कि वो देह आरू आत्मा दुय मा चुखलो होय, पुन वियाव संसार की चिंता मा रयती छे कि आपने घर वावो खुश राखे।
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